थे छो रिद्धि सिद्ध का सरताज
थे छो रिद्ध-सिद्ध का भरतार,
म्हार घर आओ जी गणराज
शिव पार्वती का लाला,
थांक गले वैजन्ती माला
करो थे सबका पूर्ण काज,
थान सुमरा सारा पैली,
दिज्यों बता ज्ञान की गैली
नही मन माया को अभिमान
जठ घूम जाय थारो घोठो,
बठ काई बात को टोठो
थारो सबसे न्यारो मिजाज
गढ़ रणथभंवर का राजा,
म्हारी नैया पार लगाजा
बचा समदर में डूबी जाज
भगतभगवान सहाय पर झाको,
सिर हाथ मेल ज्यो थांको
राखो इ बाना की लाज