आओ 2 जी गजानन्द म्हारे द्वार
आओ जी गजानन्द म्हारे द्वार,
थांकी जोवा बाटडली
रणथभंवर देवा आप बिराजे
थांक रिद्ध-सिद्ध-चंदर डुलाये
चुन-चुन कलिया देवा माला बनाया
मै तो गणपति गले पहनाये
घिस-घिस देवा, करू-जी अरगसा
थांक कैंसर तिलक लगाये
गूगल धूप देवा देती आरती
थांक लड़वा रो भोग लगाय
तानसेन गणपति गुण गावे
वो तो भूल्यान राह बताये