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Maiya thara lala n shabas

बालाजी के भजन 6 बार पढ़ा गया

बाला जी भजन

माई थारा लाला न शाबास, हथेलियां माई पर्वत न उठा ल्यायो ये।

पुरो पुरो रामादल अयां बोल कतरो तगडो थारो लाल अंजनी मा इन कांई तो खिलायों ये , थारो पुत तो बेमिशाल

माय थारो लालो लड रणक माय, टपा टप टपक पसीना सा
समदर माल बांधी पाल, जड दिया नगीना सा
मण मण की सिला तो तिरायो ये

माय थारो लालो बड़ों ये बलान
कद्या भी जग में न हार लो
जो रागस कुबद कर लो वो वा न मार लो
दुनिया क माई नाम तो कमायो ये

माई थारो लालो बाजी मार
जीत लिया सतयुग द्वापर राज
कवि रामौतार की कविता इन लिख छ चतुर सुजान
सभा क माई गाय तो सुणायो ये