मत मार र भरत भाई बाण र
मत मार र भरत भाई बाण र
थारा बीरा का निकल जाला प्राण र
राम रावण में छिडगी लडाई
जनक राज की सीता माई
उठ चाल रिया लिर कबाण रे
लड रिया जोधा रण क माही
बाण लग्यो लक्ष्मण उर माही
तीरे मेघनाथ दियो ताण रध
जा बाद मत, रोको बीच म
पाठ – पढावा रावण नीच ने
ले के पर्वत भरती उडाण र
द्रोणा गिरी पर करदी चढ़ाई
मैं मतिहीन समझ नही पाई
गाव ‘मालूणी, बचालियो प्राण र