बालाजी को तगड़ो काम
बालाजी को तगड़ो काम लंका बीच घुमादियो घोठा न
रावण की लंका नगरी म,
धूम मचा दियो सगली
कोई माच्यो हा-हाकार
जो बालाजी का साम आवे,
एक 2 घोठा की खाव
बाको हो जा काम तमाम
रावण की बगिया क माही,
दुख पाव देखो सीतमाई
बालो दियो बाग उजाड
वा रे वा बजरेगी बीरा,
पाछो आ गयो समदर तिरा
ज्यान गाव राम कुमार